Census India 2027 Update: केंद्र सरकार और जनगणना निदेशालय ने आगामी राष्ट्रीय जनगणना को समयबद्ध और त्रुटिहीन तरीके से पूरा करने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। जनगणना कार्य में लगे किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का तबादला अब 31 मार्च 2027 तक नहीं किया जा सकेगा। जनगणना निदेशालय द्वारा जारी इस आदेश का उद्देश्य कार्य की निरंतरता बनाए रखना और डिजिटल जनगणना के जटिल कार्य को बिना किसी बाधा के संपन्न करना है।
क्यों लगाई गई तबादलों पर रोक?
भारत की आगामी जनगणना ऐतिहासिक होने वाली है क्योंकि यह देश की पहली ‘डिजिटल जनगणना’ होगी। इसमें डेटा संकलन के लिए मोबाइल ऐप और आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाना है। ऐसे में, कर्मचारियों को दी जाने वाली विशेष ट्रेनिंग और उनके द्वारा शुरू किए गए फील्ड वर्क में किसी भी प्रकार का बदलाव पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
निदेशालय के अनुसार, यदि बीच में किसी अधिकारी या गणनाकार (Enumerator) का तबादला होता है, तो नए कर्मचारी को फिर से ट्रेनिंग देनी होगी, जिससे न केवल समय की बर्बादी होगी बल्कि आंकड़ों की सटीकता पर भी असर पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस आदेश का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है।
किन-किन पर लागू होगा यह आदेश?
यह आदेश उन सभी सरकारी विभागों और कर्मचारियों पर लागू होगा जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जनगणना कार्य (Census Duty) के लिए नामांकित हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- प्रशासनिक अधिकारी: जिला कलेक्टर (Distict Census Officers), तहसीलदार और नायब तहसीलदार।
- शिक्षा विभाग: बड़ी संख्या में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षक जिन्हें ‘इन्यूमरेटर’ और ‘सुपरवाइजर’ बनाया गया है।
- स्थानीय निकाय: नगर निगम, नगर पालिका और पंचायत स्तर के कर्मचारी।
- सांख्यिकी विभाग: डेटा संकलन और विश्लेषण में लगे विशेषज्ञ।
जनगणना 2027 का संभावित शेड्यूल
सूत्रों और विभागीय रिपोर्टों के अनुसार, जनगणना का कार्य दो मुख्य चरणों में पूरा किया जाएगा:
- प्रथम चरण (मकान सूचीकरण): यह चरण अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 के बीच प्रस्तावित है। इसमें घरों की गिनती और उनकी स्थिति का विवरण जुटाया जाएगा।
- द्वितीय चरण (जनसंख्या गणना): वास्तविक जनसंख्या की गणना फरवरी 2027 में शुरू होगी। 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि को संदर्भ तिथि (Reference Date) माना जाएगा।
तबादलों पर रोक की समयसीमा (31 मार्च 2027) इसी दूसरे चरण के पूरा होने और डेटा के शुरुआती मिलान के बाद ही खत्म होगी।
डिजिटल जनगणना: तकनीक और चुनौतियां
इस बार कागज-कलम के बजाय स्मार्टफोन और टैबलेट का उपयोग होगा। सरकार ने इसके लिए एक समर्पित ‘सेंसस पोर्टल’ और मोबाइल एप्लीकेशन विकसित किया है। कर्मचारियों को डेटा सुरक्षा (Data Privacy) और तकनीकी संचालन के लिए विशेष सत्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। तबादलों पर रोक लगने से यह सुनिश्चित होगा कि प्रशिक्षित कर्मचारी ही अपने आवंटित क्षेत्र (Block) का कार्य पूरा करें।
विशेष परिस्थितियों में ही मिलेगा अपवाद
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सामान्य तबादलों पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। हालांकि, पदोन्नति (Promotion), सेवानिवृत्ति (Retirement), या किसी गंभीर चिकित्सा स्थिति जैसे अपरिहार्य कारणों में ही तबादले पर विचार किया जाएगा। इसके लिए संबंधित राज्य के मुख्य सचिव या जनगणना निदेशालय से विशेष अनुमति लेनी होगी।
सुव्यवस्थित डेटा के लिए कड़ा कदम
जनगणना केवल एक गिनती नहीं है, बल्कि यह अगले 10 वर्षों के लिए सरकारी योजनाओं, बजट आवंटन और परिसीमन (Delimitation) का आधार बनती है। 2021 की जनगणना में पहले ही देरी हो चुकी है, इसलिए सरकार अब किसी भी प्रकार की प्रशासनिक ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। मार्च 2027 तक तबादलों पर रोक का यह फैसला शासन की गंभीरता को दर्शाता है।
इस आदेश के पश्चात मध्य प्रदेश में तबादलों की बाट जोह रहे हज़ारों शिक्षकों व् अन्य विभागों के लोक सेवकों की उम्मीदों पर पानी फिर गया हैं जो कि लम्बे समय से स्थानांतरण चाह रहे थे I
मध्यप्रदेश में जनगणना कार्य में लगे लोकसेवकों के स्थानान्तरण में रोक संबंधी आदेश पढने –



