वर्ष 2022 के राज पत्र का पालन करें स्कूल शिक्षा विभाग, संशोधित राजपत्र के आधार पर करे उच्च माध्यमिक शिक्षकों का हाई स्कूल प्राचार्य पद पर प्रमोशन I शिक्षक संगठनों ने की मांग I

भोपाल। मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत शैक्षणिक संवर्ग के नियमों और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं। इस बीच शिक्षा विभाग से जुड़े विभिन्न संगठनों और नवीन संवर्ग के शिक्षकों द्वारा १ दिसम्बर २०२२ को जारी असाधारण राजपत्र में किए गए संशोधनों को पूर्णतः लागू करने और उसी के आधार पर उच्च माध्यमिक शिक्षकों का हाई स्कूल प्राचार्य (या उप प्राचार्य) के पद पर प्रमोशन करने की मांग की है।

भारत के संविधान के अनुच्छेद ३०९ के द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए मध्यप्रदेश के राज्यपाल द्वारा “मध्यप्रदेश राज्य स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक संवर्ग) सेवा शर्तें एवं भर्ती नियम, २०१८” में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए थे। इस नियमों में संशोधन उपरान्त वर्ष 2022 का राजपत्र जारी किया गया , इन नियमों के अनुसार शिक्षा विभाग में विभिन्न पदों पर पदोन्नति और सीधी भर्ती के नियम और स्पष्ट निर्देश निर्धारित किए गए हैं, जिनका अक्षरशः पालन किए जाने की आवश्यकता है।

राजपत्र के अनुसार पदोन्नति का गणित और नियम

संशोधित राजपत्र की अनुसूची-चार (नियम १४) के अनुसार, उच्च माध्यमिक शिक्षक से प्राचार्य हाईस्कूल या उप प्राचार्य के पद पर पदोन्नति के लिए न्यूनतम ५ वर्ष का कार्यानुभव होना अनिवार्य है। राजपत्र में स्पष्ट किया गया है कि इस पदोन्नति प्रक्रिया के लिए एक उच्च स्तरीय विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) का गठन किया जाएगा। इस समिति की संरचना निम्नानुसार निर्धारित की गई है:
१. अध्यक्ष: आयुक्त, लोक शिक्षण
२. सदस्य: संचालक, लोक शिक्षण
३. सदस्य: अतिरिक्त संचालक / संयुक्त संचालक
४. सदस्य सचिव: उप संचालक / सहायक संचालक

राजपत्र की अनुसूची-दो में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्राचार्य हाईस्कूल/उप प्राचार्य के कुल १०५०+६४ पदों में से १०० प्रतिशत पदों को केवल पदोन्नति (प्रमोशन) के माध्यम से ही भरा जाना है। ऐसे में उच्च माध्यमिक शिक्षकों के पास इस पद पर पदोन्नत होने का एक बड़ा और न्यायसंगत अवसर मौजूद है, बशर्ते विभाग नियमों के तहत समय पर डीपीसी (DPC) का आयोजन करे।

पदोन्नति के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं और प्रशिक्षण अनिवार्य

इस राजपत्र में पदोन्नत होने वाले लोक सेवकों के लिए कुछ कड़ी शर्तें भी जोड़ी गई हैं। अनुसूची-चार के अंतर्गत दी गई ‘टीप’ (कन्जंक्चरल नोट्स) के अनुसार, जो भी लोक सेवक हाईस्कूल के प्राचार्य के पद पर पदोन्नत किया जाएगा, उसे अनिवार्य रूप से ३ वर्ष के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ किया जाएगा। ग्रामीण शिक्षा को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से यह प्रावधान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसके साथ ही, पदोन्नत लोक सेवक को प्रशासनिक और शैक्षणिक दक्षता बढ़ाने के लिए निम्नलिखित प्रशिक्षणों को सफलतापूर्वक पूर्ण करना होगा:
  • शैक्षणिक प्रबंधन में डिप्लोमा: किसी मान्यता प्राप्त संस्था से एक माह का प्रशिक्षण प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
  • नेतृत्व प्रशिक्षण: सीमेट (CIMET) या भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM), इंदौर से एक माह का नेतृत्व प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा।
  • यदि कोई लोक सेवक इस प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूर्ण नहीं कर पाता है, तो उसे एक वर्ष का अतिरिक्त अवसर दिया जाएगा। इसके बावजूद भी प्रशिक्षण पूरा न होने की स्थिति में संबंधित लोक सेवक को उसके मूल पद (पदोन्नति के पूर्व पद) पर वापस प्रत्यावर्तित (डी-प्रमोट) कर दिया जाएगा।

उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों के लिए ‘पारी बाहर’ पदोन्नति

संशोधित नियमों में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। नियमों के अनुसार, ऐसे माध्यमिक शिक्षक एवं प्राथमिक शिक्षक जिन्होंने शिक्षकों के राष्ट्रीय/राज्य योजना पुरस्कार स्कीम के अंतर्गत राष्ट्रपति या राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त किया हो, उन्हें ‘पारी बाहर’ (आउट ऑफ टर्न) पदोन्नति दी जाएगी। हालांकि इसके लिए यह शर्त रखी गई है कि उन्हें वरिष्ठ वेतनमान या समयमान वेतनमान प्राप्त हो चुका हो और वे पदोन्नति के लिए अन्य सभी अर्हताएं पूरी करते हों।

अन्य महत्वपूर्ण नियम और पात्रता परीक्षा की आजीवन वैधता

१ दिसम्बर २०२२ के इस राजपत्र में केवल पदोन्नति ही नहीं, बल्कि सीधी भर्ती को लेकर भी बड़े बदलाव किए गए थे। नियम ११ में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया गया था कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की वैधता अब आजीवन रहेगी। वर्ष २०१८ और इसके बाद आयोजित होने वाली सभी पात्रता परीक्षाओं के लिए यह आजीवन वैधता का नियम लागू माना जाएगा।

इसके अलावा, पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अभ्यर्थियों को नियोजन के लिए एक विषयवार ‘चयन परीक्षा’ में सम्मिलित होना और उसे उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी निर्देशों के तहत आरक्षण और शिथिलता के प्रावधान भी लागू रहेंगे। इसके अतिरिक्त, दिव्यांगजनों के लिए दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम २०१६ के तहत ६ प्रतिशत पदों के आरक्षण को श्रेणीवार (दृष्टिबाधित, बहरे, लोकोमोटर डिसेबिलिटी और बहुविकलांगता) विभाजित करते हुए १.५ प्रतिशत की सीमा के भीतर देय बनाने का आदेश समाहित किया गया है।

शिक्षकों की मांग: नियमों का हो कड़ाई से पालन

वर्तमान में शिक्षकों के बीच यह मांग जोर पकड़ रही है कि जब स्कूल शिक्षा विभाग ने स्वयं वर्ष २०२२ में इन नियमों को राजपत्र के माध्यम से अधिसूचित किया है, तो इनका क्रियान्वयन पूरी निष्पक्षता और कड़ाई से होना चाहिए। कई उच्च माध्यमिक शिक्षक जो पिछले कई वर्षों से एक ही पद पर कार्य कर रहे हैं और प्राचार्य पद के लिए आवश्यक ५ वर्षों के कार्यानुभव की पात्रता को पार कर चुके हैं, वे अपनी पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि विभाग को बिना किसी देरी के आयुक्त लोक शिक्षण की अध्यक्षता में विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक बुलानी चाहिए और ग्रामीण क्षेत्रों में प्राचार्यों के रिक्त पड़े पदों को इन अनुभवी शिक्षकों के माध्यम से भरना चाहिए, ताकि नियमों के तहत इन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में तीन साल की सेवा देने और आईआईएम इंदौर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिल सके। विभाग द्वारा इस दिशा में त्वरित कदम उठाए जाने से न केवल शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि हाईस्कूलों को स्थाई और योग्य प्रशासनिक नेतृत्व भी मिल सकेगा।


पदोन्नति से जुड़े कुछ अन्य नियम (अनुसूची-४ के अनुसार):

  • माध्यमिक शिक्षक / प्रधानाध्यापक (माध्यमिक शाला) से उच्च माध्यमिक शिक्षक पद हेतु: ०५ वर्ष का अनुभव
  • माध्यमिक शिक्षक से प्रधानाध्यापक माध्यमिक शाला पद हेतु: ०५ वर्ष का अनुभव
  • प्राथमिक शिक्षक से माध्यमिक शिक्षक पद हेतु: ०५ वर्ष का अनुभव
  • प्राथमिक शिक्षक से प्रधानाध्यापक (प्राथमिक शाला) पद हेतु: ०५ वर्ष का अनुभव

यदि विभाग वर्ष २०२२ के संशोधित राजपत्र की इन समस्त गाइडलाइन्स और अनुसूचियों का पूरी तरह से पालन करता है, तो राज्य की स्कूल शिक्षा व्यवस्था में एक सकारात्मक और नियमसंगत बदलाव देखने को मिलेगा।

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