मध्य प्रदेश सरकार ने शासकीय सेवकों के हित में एक महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला लिया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD), मंत्रालय, भोपाल द्वारा जारी एक नए आधिकारिक आदेश के अनुसार, राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए क्रमोन्नति योजना (Kramonnati Yojana) के नियमों में एक बड़ा संशोधन किया गया है।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी इस नए आदेश का पत्र क्रमांक 887/1998160/2024/1/3 है और इसे दिनांक 29 अगस्त, 2024 को आधिकारिक रूप से जारी किया गया है। इस नए बदलाव के बाद अब यदि कोई कर्मचारी क्रमोन्नति/समयमान का वित्तीय लाभ लेने के बाद नियमित पदोन्नति (Promotion) को स्वीकार करने से इनकार करता है, तो भी उसका पहले से मिल रहा उच्चतर वेतनमान का वित्तीय लाभ वापस नहीं लिया जाएगा। सरकार के इस कदम से हजारों कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।
क्या है पुराना नियम और क्यों थी कर्मचारियों में चिंता?
मध्य प्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा वर्ष 2002 में जारी परिपत्र क्र. एफ 1-1/1/वेआप्र/99, दिनांक 23.9.2002 की कंडिका-4 के तहत एक सख्त प्रावधान था। पुराने नियम के अनुसार:
- यदि किसी शासकीय सेवक को क्रमोन्नति योजना का लाभ दिया जा चुका है, और बाद में उसे उच्च पद पर नियमित पदोन्नति दी जाती है।
- यदि वह कर्मचारी किसी भी व्यक्तिगत या पारिवारिक कारण से उस पदोन्नति को लेने से इनकार (Refuse) कर देता है, तो उसे क्रमोन्नति के तहत दिया गया बढ़ा हुआ वेतनमान समाप्त कर दिया जाता था।
- पदोन्नति आदेशों में भी यह स्पष्ट लिखा होता था कि पदोन्नति का परित्याग करने पर पुराना क्रमोन्नति वेतनमान भी छीन लिया जाएगा।
इस नियम के कारण कई कर्मचारी मजबूरी में अपनी इच्छा के विरुद्ध दूर-दराज के जिलों में पदोन्नति लेने को मजबूर थे, या फिर प्रमोशन छोड़ने पर उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था।
नए संशोधन (Amended Rule) में क्या दी गई है राहत?
राज्य सरकार द्वारा गहन विचार-विमर्श के बाद 23 सितंबर 2002 के पुराने परिपत्र की कंडिका-4 को पूरी तरह से प्रतिस्थापित (Replace) कर दिया गया है। 29 अगस्त, 2024 को जारी आदेश क्रमांक 887/2024/1/3 की बिंदु संख्या 2 के अनुसार:
“इस योजना के अंतर्गत उच्चतर वेतनमान का वित्तीय लाभ लेने के पश्चात यदि कोई कर्मचारी बाद में नियमित पदोन्नति स्वीकार करने से इंकार करता है तो उसे पूर्व से स्वीकृत उच्चतर वेतनमान के अंतर्गत वित्तीय लाभ वापस नहीं लिया जावेगा, परन्तु बाद में उसे कोई उच्चतर वेतनमान का वित्तीय लाभ देय नहीं होगा।”
इसका सीधा मतलब क्या है?
- सुरक्षित रहेगा पुराना लाभ: अगर आपको टाइम-स्केल या क्रमोन्नति के तहत बढ़ा हुआ ग्रेड पे या वेतन मिल रहा है, तो प्रमोशन ठुकराने पर भी वह सैलरी कम नहीं होगी।
- भविष्य के लाभ पर रोक: हालांकि, प्रमोशन छोड़ने के बाद आपको भविष्य में मिलने वाली अगली क्रमोन्नति या किसी अन्य उच्चतर वेतनमान का वित्तीय लाभ नहीं दिया जाएगा।
कब से लागू होंगे ये नए निर्देश?
विभाग द्वारा जारी पत्र के बिंदु संख्या 3 में यह साफ किया गया है कि:
- यह नया निर्देश आदेश जारी होने के दिनांक (29 अगस्त, 2024) से ही प्रभावशील (Effective) माना जाएगा।
- सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पुराने निर्णित प्रकरण पुनः नहीं खोले जाएंगे। यानी जिन कर्मचारियों पर पुराने नियम के तहत 29 अगस्त 2024 से पहले कार्रवाई हो चुकी है या जिनके पैसे कट चुके हैं, उनके मामलों पर दोबारा विचार नहीं किया जाएगा।
किन-किन विभागों और अधिकारियों पर लागू होगा यह आदेश?
आदेश क्रमांक 887/1998160/2024/1/3 मध्य प्रदेश शासन के अंतर्गत आने वाले सभी क्षेत्रों के लिए बाध्यकारी है। इसे निम्नलिखित प्रमुख स्तरों पर भेजकर तुरंत लागू करने के निर्देश दिए गए हैं:
- शासन के समस्त विभाग (All Departments of MP Govt)
- अध्यक्ष, राजस्व मण्डल, म०प्र० ग्वालियर
- समस्त विभागाध्यक्ष (Heads of Departments)
- समस्त संभागायुक्त (Divisional Commissioners)
- समस्त कलेक्टर (District Collectors)
- समस्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जिला पंचायत
यह आदेश मध्य प्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार अवर सचिव, सुमन रायकवार द्वारा हस्ताक्षरित किया गया है।
कर्मचारियों के लिए एक व्यावहारिक फैसला
मध्य प्रदेश सरकार का यह निर्णय शासकीय सेवकों के लिए व्यावहारिक और मानसिक शांति देने वाला है। कई बार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, बच्चों की पढ़ाई या बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल के कारण कर्मचारी प्रमोशन के बाद होने वाले ट्रांसफर को स्वीकार नहीं कर पाते थे। अब वे बिना किसी आर्थिक डर या वेतन कटौती के भय के अपनी परिस्थितियों के अनुसार निर्णय ले सकेंगे।
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