MP News: मध्य प्रदेश में अतिथि स्पेशल एजुकेटर्स के लिए बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 31 जुलाई तक बढ़ी सेवाएँ I कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर / खेल शिक्षकों / अतिथि शिक्षकों को भी राहत की उम्मीद I

भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत अतिथि स्पेशल एजुकेटर्स (Guest Special Educators) के लिए एक राहत भरी खबर आई है। लोक शिक्षण संचालनालय, मध्य प्रदेश ने माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के निर्देशों का पालन करते हुए इन शिक्षकों की सेवाओं को आगामी आदेश तक निरंतर रखने का निर्णय लिया है।

समग्र शिक्षा (सेकेंडरी एजुकेशन) द्वारा जारी ताजा आदेश के अनुसार, अब इन शिक्षकों की सेवाएँ 31 जुलाई 2026 तक प्रभावी रहेंगी। यह निर्णय उन सैकड़ों अभ्यर्थियों के लिए संजीवनी बनकर आया है, जिनकी सेवा अवधि 30 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रही थी।

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का पालन

लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी पत्र (क्रमांक/स.शि.अ./CWSN/2025-26/2067) में स्पष्ट किया गया है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए ‘समग्र शिक्षा’ और ‘पीएम श्री’ योजना के अंतर्गत विभिन्न पदों पर अस्थाई रूप से अभ्यर्थियों की नियुक्ति की गई थी। पूर्व के निर्देशों के तहत इनकी सेवाएँ 30 अप्रैल तक ही ली जानी थीं।

हालांकि, माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रकरण क्रमांक WP(C) 132/2016 में पारित अंतरिम निर्णय के अनुपालन में अब यह तय किया गया है कि अतिथि स्पेशल एजुकेटर्स आगामी आदेश या 31 जुलाई 2026 (जो भी पहले हो) तक अपनी सेवाएँ देते रहेंगे।

ग्रीष्मकालीन अवकाश में भी सौंपी गई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ

आमतौर पर स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश (Summer Vacation) के दौरान शैक्षणिक गतिविधियाँ बंद रहती हैं, लेकिन स्पेशल एजुकेटर्स के लिए विभाग ने विशेष कार्ययोजना तैयार की है। आदेश के मुताबिक अवकाश की अवधि में उन्हें निम्नलिखित कार्य करने होंगे:

  1. दिव्यांग बच्चों का नामांकन: स्पेशल एजुकेटर अपने संकुल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी दिव्यांग बच्चों का स्कूलों में प्रवेश सुनिश्चित करेंगे। विशेष रूप से कक्षा 8वीं उत्तीर्ण कर चुके दिव्यांग विद्यार्थियों का कक्षा 9वीं में नामांकन कराना उनकी प्राथमिकता होगी।
  2. होम-बेस्ड एजुकेशन (गृह-आधारित अध्यापन): संकुल क्षेत्र के अंतर्गत स्कूलों में पढ़ रहे ऐसे दिव्यांग विद्यार्थी जिन्हें विशेष सहायता की आवश्यकता है, उन्हें ग्रीष्मकाल में घर जाकर शिक्षा (Home-Based Education) प्रदान की जाएगी।
  3. प्रगति रिपोर्ट: इन गतिविधियों की मासिक प्रगति रिपोर्ट संकुल प्राचार्य के माध्यम से जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को अनिवार्य रूप से भेजनी होगी।

मानदेय और उपस्थिति के नियम

विभाग ने स्पष्ट किया है कि अतिथि स्पेशल एजुकेटर्स के मानदेय का भुगतान स्कूलों में दर्ज ई-अटेंडेंस (e-Attendance) के आधार पर ही किया जाएगा। इससे व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहेगी और केवल सक्रिय रूप से कार्य कर रहे शिक्षकों को ही भुगतान सुनिश्चित होगा।

न्यायालय के अंतिम फैसले पर टिकेगी भविष्य की राह

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह आदेश पूरी तरह से माननीय उच्चतम न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन है। यदि भविष्य में न्यायालय इस संबंध में कोई अन्य निर्णय लेता है, तो विभाग तदनुसार कार्यवाही करेगा। प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि इस आदेश को अन्य प्रकरणों में उदाहरण (Precedent) के रूप में मान्य नहीं किया जाएगा। यद्यपि स्कूल शिक्षा विभाग ऐसा मानता हैं किन्तु माननीय न्यायालय के इस आदेश के बाद प्रदेश के विद्यालयों के कार्य कर रहे कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर / खेल शिक्षकों / अतिथि शिक्षकों को भी न्यायालय से इसी प्रकार राहत की उम्मीद अवश्य बन्ध गई हैI

दिव्यांग शिक्षा की दिशा में एक कदम

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए काम कर रहे इन शिक्षकों की सेवा वृद्धि न केवल उनके रोजगार की सुरक्षा है, बल्कि यह प्रदेश के दिव्यांग छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए भी सुखद है। ग्रीष्मकालीन अवकाश में ‘होम-बेस्ड एजुकेशन’ का प्रावधान यह दर्शाता है कि सरकार दिव्यांग शिक्षा की निरंतरता को लेकर गंभीर है।

अतिथि स्पेशल एजुकेटर्स की सेवा संबंधी आदेश देखें –

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